एससी/एसटी एक्ट में जमानत तभी, जब केस कमजोर हो, दलितों के केस में सुप्रीम कोर्ट ने खींची लक्ष्मण रेखा
नई दिल्ली: देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा है कि दलितों के खिलाफ उत्पीडऩ से जुड़े मामले यानी एससी/एसटी एक्ट 1989 के तहत दर्ज मामलों में किसी भी आरोपी को अग्रिम जमानत तभी दी जा सकती है, जब स्पष्ट रूप से यह साबित हो कि आरोपी के खिलाफ प्रथम द्रष्टया कोई मामला न बनता हो। यानी पहली नजर में ही यह तथ्य साबित हो जाए कि आरोपी ने दलित समुदाय के प्रति कोई हिंसा नहीं की है।
सीजेआई बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कमजोर वर्ग की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से लाया गया था और यह आरोपी को गिरफ्तारी से पूर्व जमानत देने पर रोक लगाता है। इसके साथ ही पीठ ने जातिगत अत्याचार के आरोपों का सामना कर रहे एक आरोपी को अग्रिम जमानत देने संबंधी बांबे हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया।

राशिफल 05 मई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
पांच राज्यों के चुनाव नतीजों ने बदली देश की राजनीति, कहीं कमल की सुनामी तो कहीं सत्ता परिवर्तन का बड़ा संदेश, दो सीएम सहित कई दिग्गज हारे
“विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत पर भाजपा का विजय उत्सव, सीएम मोहन यादव ने कार्यकर्ताओं को दी बधाई”
Narendra Modi बोले – बंगाल में खिला कमल, कार्यकर्ताओं को दी जीत की बधाई
दिल्ली में मौसम ने ली करवट, लोगों को मिली गर्मी से राहत
